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आप और आपके हस्बैंड के पैरेंट्स के बीच पेरेंटिंग डिफरेंसेस को कैसे हैंडल करें

By PurpleGirl EditorsUpdated May 20264 min read
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PurpleGirl Editorial Team · Reviewed by experienced women writers & researchers

सोचिए, आप और आपका हस्बैंड अपने पहले बच्चे के लिए तैयारियों में जुटे हैं। नर्सरी रंगी हुई है, डायपरों का ढेर लगा है, और आपने पेरेंटिंग की सभी किताबें पढ़ ली हैं। लेकिन जब आप अपने ससुराल वालों के पास जाते हैं, तो उनकी बच्चों को पालने की सोच आपकी सोच से टकरा जाती है। अचानक, ऐसा लगता है जैसे आप किसी मुश्किल स्थिति में आ गए हैं। यहां हम जानेंगे कि इन पेरेंटिंग डिफरेंसेस को कैसे संभालें, ताकि आप और आपके हस्बैंड एक साथ अपने बच्चे की परवरिश कर सकें।

Community Advice Disclaimer: This guide is based on community experiences and lifestyle advice. It is not a substitute for professional medical, psychological, or legal advice. Always consult a qualified healthcare provider for personal diagnoses or treatments.

What You'll Need

  • खुले मन से बात करने की तैयारी
  • आपसी समझ
  • समय और धैर्य
1

पेरेंटिंग डिफरेंसेस पर खुलकर बात करें

जब पेरेंटिंग के तरीके अलग-अलग हों, तो खुला संवाद बहुत जरूरी है। अपने हस्बैंड के साथ बैठकर इस पर चर्चा करें कि आप किस तरह से अपने बच्चे को पालना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपके ससुराल वाले बच्चों को जल्दी सख्त अनुशासन में लाने का विचार रखते हैं, जबकि आप उन्हें प्यार और सहानुभूति से बड़ा करना चाहती हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप दोनों एकसाथ इस पर विचार करें। इससे आपको एक दूसरे की सोच को समझने में मदद मिलेगी और आप दोनों एकजुट होकर अपने ससुराल वालों से बात कर सकेंगे।

2

प्यार और इज्जत के साथ सीमाएं तय करें

अपने ससुराल वालों के प्रभाव को प्रबंधित करने के लिए सीमाएं तय करना आवश्यक है। यह आसान है कि आप उनकी बातों को मान लें, लेकिन आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि आपके बच्चे की भलाई सबसे पहले आती है। अगर आपके ससुराल वाले कुछ ऐसी चीजें हैं जो आप नहीं चाहतीं, तो उन्हें प्यार से बताएं कि आप किस तरह की पेरेंटिंग करना चाहती हैं। जैसे कि, अगर वे आपके बच्चे को जंक फूड खाने के लिए कहते हैं, तो आप कह सकती हैं कि 'हम कोशिश कर रहे हैं कि बच्चे को हेल्दी खाना दिया जाए।'

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3

पेरेंटिंग शैलियों में सामान्य आधार खोजें

पेरेंटिंग के दृष्टिकोण में सामंजस्य स्थापित करना बहुत जरूरी है। कभी-कभी आपके ससुराल वालों की सोच और आपकी सोच में भिन्नता होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप एक-दूसरे की बात नहीं सुन सकते। उदाहरण के लिए, यदि आपके ससुराल वाले मानते हैं कि बच्चे को स्कूल में सख्त होना चाहिए, जबकि आप उन्हें खुद की सोच विकसित करने देना चाहती हैं, तो आप दोनों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप मिलकर एक ऐसा तरीका खोजें जिसमें बच्चे को अनुशासन और स्वतंत्रता दोनों मिलें। इससे परिवार में सामंजस्य बना रहेगा।

Step 4

संघर्ष के दौरान धैर्य और सहानुभूति का अभ्यास करें

जब पेरेंटिंग के मतभेद सामने आते हैं, तो निराश होना आसान है। आप यह सोच सकती हैं कि आपके ससुराल वाले आपकी सोच को नहीं समझते। लेकिन यह समझना जरूरी है कि हर कोई अपने तरीके से सोचता है। धैर्य रखें और जब भी किसी मुद्दे पर बहस हो, तो अपनी भावनाओं को व्यक्त करें। उदाहरण के लिए, अगर आपके ससुराल वाले आपके बच्चे को एक विशेष तरीके से सिखाना चाहते हैं, तो आप कह सकती हैं कि 'मैं समझती हूं कि आपका तरीका सही है, लेकिन मैं चाहती हूं कि बच्चे को थोड़ा अलग तरीके से सिखाया जाए।' इससे आपसी समझ बढ़ेगी।

5

अपने हस्बैंड को चर्चा में शामिल करें

अपने हस्बैंड को अपने ससुराल वालों के साथ पेरेंटिंग के मुद्दों पर चर्चा में शामिल करना बहुत महत्वपूर्ण है। जब दोनों माता-पिता अपनी बात साझा करते हैं, तो इससे एक मजबूत संदेश जाता है कि आप दोनों एकजुट हैं। इससे आपके ससुराल वालों को भी यह समझने में मदद मिलेगी कि आप दोनों अपने बच्चे के भविष्य के लिए एक ही दिशा में सोचते हैं। जैसे कि, अगर आप दोनों तय करते हैं कि बच्चे को टीवी देखने का समय सीमित करना है, तो इसे एक साथ अपने ससुराल वालों से बताएं। इससे उन्हें आपकी एकता का अहसास होगा।

6

परिवार के रूप में एक साथ जीत का जश्न मनाएं

पेरेंटिंग के दौरान चुनौतियों के बीच, छोटी-छोटी जीत का जश्न मनाना बहुत जरूरी है। जब आप और आपके हस्बैंड मिलकर अपने बच्चे की किसी उपलब्धि का जश्न मनाते हैं, तो यह परिवार में एक सकारात्मक माहौल बनाता है। जैसे कि, जब आपका बच्चा पहली बार चलने लगे या कोई नई चीज सीखे, तो इसे परिवार के साथ मिलकर मनाएं। इससे न केवल आपके बच्चे को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि यह आपके ससुराल वालों के साथ संबंध भी मजबूत करेगा।

PurpleGirl Insight

"अपने हस्बैंड के साथ मिलकर पेरेंटिंग पर अपनी सोच को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।"

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Frequently Asked Questions

मैं अपने ससुराल वालों के साथ पेरेंटिंग डिफरेंसेस को कैसे संभालूं?
अपने ससुराल वालों के साथ पेरेंटिंग डिफरेंसेस को संभालने के लिए खुली बातचीत और स्पष्ट सीमाएं तय करना जरूरी है। पहले अपने हस्बैंड के साथ अपनी पेरेंटिंग की सोच पर चर्चा करें, ताकि आप दोनों एकजुट रहें। जब आप अपने ससुराल वालों से बात करें, तो उनके विचारों की सराहना करते हुए अपनी राय स्पष्ट करें। यह सम्मानजनक तरीका सकारात्मक संवाद स्थापित कर सकता है।
अगर मेरे ससुराल वाले मेरी पेरेंटिंग चॉइस का सम्मान नहीं करते?
अगर आपके ससुराल वाले आपकी पेरेंटिंग चॉइस का सम्मान नहीं करते, तो शांत और आत्मविश्वास से भरे रहें। अपनी सीमाओं को दोहराएं और बताएं कि ये आपके बच्चे की भलाई के लिए महत्वपूर्ण हैं। आपको इन चर्चाओं को नियमित रूप से दोहराने की जरूरत पड़ सकती है, ताकि वे आपकी बात सुनें और आप अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें। लगातार संवाद से अंततः बेहतर समझ बन सकती है।
क्या अपने हस्बैंड को पेरेंटिंग पर चर्चा में शामिल करना ठीक है?
हां, अपने हस्बैंड को पेरेंटिंग पर चर्चा में शामिल करना बहुत जरूरी है। जब दोनों माता-पिता अपने मूल्यों को साझा करते हैं, तो यह आपकी पेरेंटिंग के दृष्टिकोण को मजबूत करता है और आपके ससुराल वालों को दिखाता है कि आप एकजुट हैं। यह एक संतुलित दृष्टिकोण भी प्रदान करता है और चर्चाओं के दौरान किसी भी गलतफहमी को कम करने में मदद करता है।
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