एक भारतीय महिला के तौर पर अपने शरीर और उसकी जरूरतों को कैसे समझें
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क्या कभी दिन भर की थकान के बाद आईने में देखकर आपको ऐसा लगता है कि आप किसी अजनबी के शरीर में रह रही हैं? आप थकी हुई हैं, शायद थोड़ा ब्लोटेड (bloated) महसूस कर रही हैं, या बस सब कुछ 'ऑफ' लग रहा है, लेकिन आप फिर भी काम करती रहती हैं क्योंकि हमेशा किसी न किसी का ख्याल रखना होता है—बच्चे, माता-पिता या ऑफिस का काम। बस इतना याद रखिए: अपने शरीर की बात सुनना स्वार्थी होना नहीं है। आप सिर्फ एक मशीन नहीं हैं जो बस चलती रहे; आप एक महिला हैं जिसकी अपनी असली और बदलती जरूरतें हैं। एक गहरी सांस लें, आप इस तरह महसूस करने में अकेली नहीं हैं।
What You'll Need
- एक सिंपल जर्नल या फोन में नोट ऐप
- रोजाना 10 मिनट का शांत समय
- खुद के प्रति धैर्य
- अपनी हेल्थ को प्राथमिकता देने के लिए माइंडसेट में बदलाव
अपने साइकिल और मूड को ट्रैक करें
भारतीय महिलाएं अक्सर अपने पीरियड्स या हार्मोनल बदलावों को नजरअंदाज कर देती हैं। एक सिंपल ऐप का इस्तेमाल करके अपने साइकिल को ट्रैक करना शुरू करें। गौर करें कि आप कब ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करती हैं और कब लो। यह सिर्फ पीरियड्स के बारे में नहीं है; यह आपके शरीर के नेचुरल रिदम को समझने के बारे में है ताकि आप उसी हिसाब से अपने आराम का प्लान बना सकें।
अपनी गट (gut) की सुनें
हम अक्सर वही खा लेती हैं जो बच जाता है या जो परिवार को पसंद होता है। इस बात पर ध्यान देना शुरू करें कि खाना खाने के बाद आप कैसा महसूस करती हैं। क्या दूध पीने के बाद आपको ब्लोटिंग होती है? क्या भारी या ऑयली खाना खाने के बाद आप सुस्त महसूस करती हैं? अपनी डाइट में भीगे हुए बादाम, दाल और मौसमी फलों जैसे 'देसी' सुपरफूड्स शामिल करें और देखें कि आपके एनर्जी लेवल्स में क्या बदलाव आता है।
ऐसी क्रैश डाइट से बचें जो जल्दी रिजल्ट देने का वादा करती हैं; ये अक्सर फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं।
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अपने स्ट्रेस के संकेतों को पहचानें
स्ट्रेस सिर्फ आपके दिमाग में नहीं रहता, यह आपके शरीर में भी जमा हो जाता है। क्या आपको गर्दन में दर्द, जबड़े में जकड़न या अचानक सिरदर्द होता है? ये आपके शरीर के तरीके हैं यह कहने के कि 'मुझे ब्रेक चाहिए'। जब आप ऐसा महसूस करें, तो जो कर रही हैं उसे रोक दें, पांच मिनट के लिए वहां से हट जाएं और गहरी सांस लें।
"आपका शरीर आपका पहला घर है; इसे वही प्यार और देखभाल दें जो आप अपने अपनों को देती हैं।"
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