ससुराल वालों की दहेज की मांग को अपने उसूलों से समझौता किए बिना कैसे संभालें
Reviewed by
Dr. Ritu Bansal · MA (Psychology), M.Phil (Clinical Psychology)
वह पल जब ससुराल वाले दहेज की बात छेड़ते हैं, तो दिल बैठ सा जाता है। आप हैरान, डरी हुई या शर्मिंदा महसूस कर सकती हैं। क्या यह सच में हो रहा है? यह एक बहुत मुश्किल स्थिति है और कई महिलाएं इससे गुजरती हैं। ऐसा महसूस करना बिल्कुल स्वाभाविक है। जब आपके उसूलों और आपकी नई जिंदगी पर बात आती है, तो मन में उलझन होना लाजमी है।
What You'll Need
- आंतरिक मजबूती
- सपोर्टिव पार्टनर (अगर संभव हो)
- अपनी बात साफ तरीके से रखने का हुनर
- धैर्य
- अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी
अपने अधिकारों और कानून को समझें
सबसे पहले यह जान लें कि भारत में दहेज मांगना गैर-कानूनी है। 'दहेज निषेध अधिनियम, 1961' जैसे कानूनों को समझना आपको ताकत देता है। यह सिर्फ कानून जानने के बारे में नहीं है, बल्कि यह जानने के बारे में है कि अगर बात गंभीर होती है, तो कानून आपके साथ है। यह जानकारी आपको मजबूती से खड़े होने का हौसला देगी।
अपने पार्टनर के साथ खुलकर बात करें
आपके पति आपके सबसे बड़े साथी हैं। उनसे खुलकर बात करें कि इन मांगों से आपको कैसा महसूस हो रहा है और ये आपके उसूलों के खिलाफ क्यों हैं। उन्हें समझाएं कि आप अपनी शादी को प्यार और सम्मान की नींव पर बनाना चाहती हैं, न कि पैसों के लेनदेन पर। उनकी समझ और साथ बहुत जरूरी है। अगर वे आपके साथ हैं, तो आप इस समस्या का सामना मिलकर कर सकती हैं।
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मजबूत और सम्मानजनक सीमाएं तय करें
जब आप और आपके पार्टनर ने इस पर बात कर ली हो और फिर भी मांगें जारी रहें, तो आपको सीधे ससुराल वालों से बात करनी पड़ सकती है या अपने पति से कहलवाना होगा। शांति से लेकिन मजबूती से कहें कि आप इन मांगों को पूरा नहीं कर सकतीं और आपकी शादी आपसी सम्मान पर टिकी है। बहस से बचें, बस अपनी बात साफ रखें। जैसे: 'हम आपकी इज्जत करते हैं, लेकिन हम वह नहीं दे सकते जो आप मांग रहे हैं। हमारा ध्यान साथ मिलकर अपनी जिंदगी बनाने पर है।'
भरोसेमंद परिवार या दोस्तों से मदद लें
आपको इस दौर से अकेले गुजरने की जरूरत नहीं है। किसी भरोसेमंद बड़ी बहन, आंटी या ऐसी दोस्त से बात करें जो आपकी स्थिति और उसूलों को समझती हो। कभी-कभी बाहर का नजरिया या इमोशनल सपोर्ट बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। वे सलाह दे सकते हैं या जरूरत पड़ने पर बीच-बचाव भी कर सकते हैं।
"आपकी कीमत इस बात से नहीं आंकी जाती कि आप क्या लेकर आई हैं, बल्कि इस बात से कि आप खुद क्या हैं।"
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